Farooq Shamim's Photo'

फ़ारूक़ शमीम

1953 | औरंगाबाद, भारत

फ़ारूक़ शमीम

ग़ज़ल 6

अशआर 7

वक़्त इक मौज है आता है गुज़र जाता है

डूब जाते हैं जो लम्हात उभरते कब हैं

झूट सच में कोई पहचान करे भी कैसे

जो हक़ीक़त का ही मेयार फ़साना ठहरा

हैं राख राख मगर आज तक नहीं बिखरे

कहो हवा से हमारी मिसाल ले आए

अपने ही फ़न की आग में जलते रहे 'शमीम'

होंटों पे सब के हौसला-अफ़ज़ाई रह गई

धूप छूती है बदन को जब 'शमीम'

बर्फ़ के सूरज पिघल जाते हैं क्यूँ

पुस्तकें 1

 

चित्र शायरी 1

 

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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