Firaq Gorakhpuri's Photo'

फ़िराक़ गोरखपुरी

1896 - 1982 | इलाहाबाद, भारत

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायरों में विख्यात, जिन्होंने आधुनिक उर्दू गज़ल के लिए राह बनाई/अपने गहरे आलोचनात्मक विचारों के लिए विख्यात/भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायरों में विख्यात, जिन्होंने आधुनिक उर्दू गज़ल के लिए राह बनाई/अपने गहरे आलोचनात्मक विचारों के लिए विख्यात/भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित

ग़ज़ल

कुछ इशारे थे जिन्हें दुनिया समझ बैठे थे हम

नोमान शौक़

कमी न की तिरे वहशी ने ख़ाक उड़ाने में

नोमान शौक़

किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी

नोमान शौक़

जुनून-ए-कारगर है और मैं हूँ

नोमान शौक़

ज़िंदगी दर्द की कहानी है

नोमान शौक़

जौर-ओ-बे-मेहरी-ए-इग़्माज़ पे क्या रोता है

नोमान शौक़

तुम्हें क्यूँकर बताएँ ज़िंदगी को क्या समझते हैं

नोमान शौक़

तूर था का'बा था दिल था जल्वा-ज़ार-ए-यार था

नोमान शौक़

नर्म फ़ज़ा की करवटें दिल को दुखा के रह गईं

नोमान शौक़

'फ़िराक़' इक नई सूरत निकल तो सकती है

नोमान शौक़

मय-कदे में आज इक दुनिया को इज़्न-ए-आम था

नोमान शौक़

वक़्त-ए-ग़ुरूब आज करामात हो गई

नोमान शौक़

शाम-ए-ग़म कुछ उस निगाह-ए-नाज़ की बातें करो

नोमान शौक़

समझता हूँ कि तू मुझ से जुदा है

नोमान शौक़

सितारों से उलझता जा रहा हूँ

नोमान शौक़

हिज्र-ओ-विसाल-ए-यार का पर्दा उठा दिया

नोमान शौक़

अपने ग़म का मुझे कहाँ ग़म है

ख़ालिद मुबश्शिर

आई है कुछ न पूछ क़यामत कहाँ कहाँ

ख़ालिद मुबश्शिर

आज भी क़ाफ़िला-ए-इश्क़ रवाँ है कि जो था

ख़ालिद मुबश्शिर

इश्क़ की मायूसियों में सोज़-ए-पिन्हाँ कुछ नहीं

ख़ालिद मुबश्शिर

कुछ न कुछ इश्क़ की तासीर का इक़रार तो है

ख़ालिद मुबश्शिर

दौर-ए-आग़ाज़-ए-जफ़ा दिल का सहारा निकला

ख़ालिद मुबश्शिर

हर नाला तिरे दर्द से अब और ही कुछ है

ख़ालिद मुबश्शिर

हाथ आए तो वही दामन-ए-जानाँ हो जाए

ख़ालिद मुबश्शिर

हो के सर-ता-ब-क़दम आलम-ए-असरार चला

ख़ालिद मुबश्शिर

शेर

सर में सौदा भी नहीं दिल में तमन्ना भी नहीं

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI