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इम्तियाज़ ख़ान

1989 | गुड़गाँव, भारत

इम्तियाज़ ख़ान

ग़ज़ल 14

शेर 2

हम को अक्सर ये ख़याल आता है उस को देख कर

ये सितारा कैसे ग़लती से ज़मीं पर रह गया

एहसान ज़िंदगी पे किए जा रहे हैं हम

मन तो नहीं है फिर भी जिए जा रहे हैं हम

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