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इरफ़ान सत्तार

1968 | कनाडा

ग़ज़ल 58

शेर 36

इक चुभन है कि जो बेचैन किए रहती है

ऐसा लगता है कि कुछ टूट गया है मुझ में

आबाद मुझ में तेरे सिवा और कौन है?

तुझ से बिछड़ रहा हूँ तुझे खो नहीं रहा

तुम गए हो तो अब आईना भी देखेंगे

अभी अभी तो निगाहों में रौशनी हुई है

पुस्तकें 2

Sa'at-e-Imkan

 

2016

Takrar-e-Sa'at

 

2016

 

चित्र शायरी 5

कोई मिला तो किसी और की कमी हुई है सो दिल ने बे-तलबी इख़्तियार की हुई है जहाँ से दिल की तरफ़ ज़िंदगी उतरती थी निगाह अब भी उसी बाम पर जमी हुई है है इंतिज़ार उसे भी तुम्हारी ख़ुश-बू का हवा गली में बहुत देर से रुकी हुई है तुम आ गए हो तो अब आईना भी देखेंगे अभी अभी तो निगाहों में रौशनी हुई है हमारा इल्म तो मरहून-ए-लौह-ए-दिल है मियाँ किताब-ए-अक़्ल तो बस ताक़ पर धरी हुई है बनाओ साए हरारत बदन में जज़्ब करो कि धूप सेहन में कब से यूँही पड़ी हुई है नहीं नहीं मैं बहुत ख़ुश रहा हूँ तेरे बग़ैर यक़ीन कर कि ये हालत अभी अभी हुई है वो गुफ़्तुगू जो मिरी सिर्फ़ अपने-आप से थी तिरी निगाह को पहुँची तो शाइरी हुई है

 

वीडियो 14

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हास्य वीडियो
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इरफ़ान सत्तार

Irfan Sattar Maqala On Jaun Elia Part 3/3

इरफ़ान सत्तार

ऑडियो 7

क्या बताऊँ कि जो हंगामा बपा है मुझ में

कोई मिला तो किसी और की कमी हुई है

ब-ज़ोम-ए-अक़्ल ये कैसा गुनाह मैं ने किया

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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