इसहाक़ ज़फ़र

ग़ज़ल 1

 

शेर 1

कभी कभी कोई भेजता है नज़र में चाहत की फूल कलियाँ

मोहब्बतों का नसीब ठहरा कभी कभी का उदास रहना

 

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