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जोश मलीहाबादी

1898 - 1982 | इस्लामाबाद, पाकिस्तान

सबसे गर्म मिज़ाज प्रगतिशील शायर जिन्हें शायर-ए-इंकि़लाब (क्रांति-कवि) कहा जाता है

सबसे गर्म मिज़ाज प्रगतिशील शायर जिन्हें शायर-ए-इंकि़लाब (क्रांति-कवि) कहा जाता है

ग़ज़ल

क़दम इंसाँ का राह-ए-दहर में थर्रा ही जाता है

नोमान शौक़

गुदाज़-ए-दिल से बातिन का तजल्ली-ज़ार हो जाना

नोमान शौक़

ज़ालिम ये ख़मोशी बेजा है इक़रार नहीं इंकार तो हो

नोमान शौक़

तबस्सुम है वो होंटों पर जो दिल का काम कर जाए

नोमान शौक़

ये बात ये तबस्सुम ये नाज़ ये निगाहें

नोमान शौक़

सोज़-ए-ग़म दे के मुझे उस ने ये इरशाद किया

नोमान शौक़

हैरत है आह-ए-सुब्ह को सारी फ़ज़ा सुने

नोमान शौक़

नज़्म

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI