ग़ज़ल 7

शेर 7

वैसे तुम अच्छी लड़की हो

लेकिन मेरी क्या लगती हो

मैं अपने दिल की कहता हूँ

तुम अपने दिल की सुनती हो

दिए के और हवाओं के मरासिम खुल नहीं पाते

नहीं खुलता कि इन में से ये किस की आज़माइश है

फ़क़त ग़ुस्सा पिए जाते हैं रोज़ शब के झगड़े में

कोई हंगामा कर सकते जो वहशत रास जाती

हर एक गाम पे रंज-ए-सफ़र उठाते हुए

मैं पड़ा हूँ यहाँ तुझ से दूर जाते हुए

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