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कमाल जाफ़री

1949 | दिल्ली, भारत

ग़ज़ल 12

शेर 4

क़रीब रह कि भी तू मुझ से दूर दूर रहा

ये और बात कि बरसों से तेरे पास हूँ मैं

हमेशा आप को समझा कि आप अपने हैं

हमेशा आप ने समझा कि दूसरे हैं हम

बिखरा बिखरा हूँ एक मुद्दत से

रफ़्ता रफ़्ता सँवर रहा हूँ मैं

ज़लज़ला नेपाल में आया कि हिन्दोस्तान में

ज़लज़ले के नाम से थर्रा उठा सारा जहाँ

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पुस्तकें 3

Aks-e-Tamnna

 

1981

Mere Mazameen

 

2007

Naat-o-Manqabat Ke Phool

 

2008

 

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