Khwaja Meer Dard's Photo'

ख़्वाजा मीर दर्द

1721 - 1785 | दिल्ली, भारत

सूफ़ी शायर, मीर तक़ी मीर के समकालीन। भारतीय संगीत के गहरे ज्ञान के लिए प्रसिध्द

सूफ़ी शायर, मीर तक़ी मीर के समकालीन। भारतीय संगीत के गहरे ज्ञान के लिए प्रसिध्द

ग़ज़ल

तोहमत-ए-चंद अपने ज़िम्मे धर चले

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअ'त को पा सके

फ़सीह अकमल

इश्क़ हर-चंद मिरी जान सदा खाता है

फ़सीह अकमल

क़त्ल-ए-आशिक़ किसी मा'शूक़ से कुछ दूर न था

फ़सीह अकमल

जग में आ कर इधर उधर देखा

फ़सीह अकमल

तुझी को जो याँ जल्वा-फ़रमा न देखा

फ़सीह अकमल

तेरी गली में मैं न चलूँ और सबा चले

फ़सीह अकमल

दिल मिरा फिर दुखा दिया किन ने

फ़सीह अकमल

मुझ को तुझ से जो कुछ मोहब्बत है

फ़सीह अकमल

मिलाऊँ किस की आँखों से मैं अपनी चश्म-ए-हैराँ को

फ़सीह अकमल

रब्त है नाज़-ए-बुताँ को तो मिरी जान के साथ

फ़सीह अकमल

समझना फ़हम गर कुछ है तबीई से इलाही को

फ़सीह अकमल

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI