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लाला माधव राम जौहर

1810 - 1890

हर मौक़े पर याद आने वाले कई शेर देने वाले विख्यात शायर , मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन।

हर मौक़े पर याद आने वाले कई शेर देने वाले विख्यात शायर , मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन।

उपनाम : 'जौहर'

मूल नाम : लाला माधव राम

निधन : फ़र्रूख़ाबाद, भारत

गया दिल जो कहीं और ही सूरत होगी

लोग देखेंगे तमाशा जो मोहब्बत होगी

जौहर, लाला माधव राम

(1810-1890)

फ़र्रुख़ाबाद (उ॰प्र॰) के एक दौलतमंद घराने से संबंध था जहाँ उनकी कोठी पर शाइरों का जमघट रहा करता था। बाद में आख़िरी मुग़ल बादशाह, बहादुर शाह ज़फ़रके दरबार में एक सम्मानित पद पर रहे। आज़ादी की पहली जंग लड़ने वालों का साथ देने के लिए उनकी जायदाद ज़ब्त कर ली गई। जौहर के बहुत से शेर ज़र्ब-उल-मसल (उदाहरणार्थ इस्तेमाल किए जाने वाले) बन गए हैं।