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लाला माधव राम जौहर

1810 - 1890

हर मौक़े पर याद आने वाले कई शेर देने वाले विख्यात शायर , मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन।

हर मौक़े पर याद आने वाले कई शेर देने वाले विख्यात शायर , मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन।

ग़ज़ल

आ गया दिल जो कहीं और ही सूरत होगी

फ़सीह अकमल

थोड़ा है जिस क़दर मैं पढ़ूँ ख़त हबीब का

फ़सीह अकमल

बुत-कदे में न तुझे काबे के अंदर पाया

फ़सीह अकमल

बुलबुल तो बहुत हैं गुल-ए-राना नहीं कोई

फ़सीह अकमल

यार ने इस दिल-ए-नाचीज़ को बेहतर जाना

फ़सीह अकमल

रात दिन चैन हम ऐ रश्क-ए-क़मर रखते हैं

फ़सीह अकमल

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI