ग़ज़ल 2

 

शेर 2

यूँ चार दिन की बहारों के क़र्ज़ उतारे गए

तुम्हारे बअ'द के मौसम फ़क़त गुज़ारे गए

रात बे-सुध हो के सोएगी यहाँ

इस लिए सूरज ने पर्दा कर लिया

 

"मुरादाबाद" के और शायर

  • जिगर मुरादाबादी जिगर मुरादाबादी
  • मंसूर उस्मानी मंसूर उस्मानी
  • गौहर उस्मानी गौहर उस्मानी
  • सुबहान असद सुबहान असद
  • दुष्यंत कुमार दुष्यंत कुमार
  • शाकिर हुसैन इस्लाही शाकिर हुसैन इस्लाही
  • मैराज नक़वी मैराज नक़वी
  • आरिफ हसन  ख़ान आरिफ हसन ख़ान
  • एजाज़ वारसी एजाज़ वारसी
  • सग़ीर अालम सग़ीर अालम