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मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

1790 - 1857 | लखनऊ, भारत

लखनऊ स्कूल के प्रमुख क्लासिकी शायर / अवध के आख़री नवाब, वाजिद अली शाह के उस्ताद

लखनऊ स्कूल के प्रमुख क्लासिकी शायर / अवध के आख़री नवाब, वाजिद अली शाह के उस्ताद

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़ के ऑडियो

ग़ज़ल

असर ज़ुल्फ़ का बरमला हो गया

फ़सीह अकमल

किस तरह मिलें कोई बहाना नहीं मिलता

फ़सीह अकमल

न कोई उन के सिवा और जान-ए-जाँ देखा

फ़सीह अकमल

न रहे नामा ओ पैग़ाम के लाने वाले

फ़सीह अकमल

बे-बुलाए हुए जाना मुझे मंज़ूर नहीं

फ़सीह अकमल

मिसाल-ए-तार-ए-नज़र क्या नज़र नहीं आता

फ़सीह अकमल

वहशत में भी रुख़ जानिब-ए-सहरा न करेंगे

फ़सीह अकमल

शम्अ भी इस सफ़ा से जलती है

फ़सीह अकमल

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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