Momin Khan Momin's Photo'

मोमिन ख़ाँ मोमिन

1800 - 1852 | दिल्ली, भारत

ग़ालिब और ज़ौक़ के समकालीन। वह हकीम, ज्योतिषी और शतरंज के खिलाड़ी भी थे। कहा जाता है मिर्ज़ा ग़ालीब ने उनके शेर ' तुम मेरे पास होते हो गोया/ जब कोई दूसरा नही होता ' पर अपना पूरा दीवान देने की बात कही थी।

ग़ालिब और ज़ौक़ के समकालीन। वह हकीम, ज्योतिषी और शतरंज के खिलाड़ी भी थे। कहा जाता है मिर्ज़ा ग़ालीब ने उनके शेर ' तुम मेरे पास होते हो गोया/ जब कोई दूसरा नही होता ' पर अपना पूरा दीवान देने की बात कही थी।

मोमिन ख़ाँ मोमिन पर पुस्तकें

20

Farhang-e-Kalam-e-Momin

2004

Hayat-e-Momin

Tareekh-e-Momin

1928

Insha-e-Momin

Momin Ke Khutut

1977

Intikhab-e-Dawaween

Momin Dehlavi, Naseem Dehalvi, Tasleem Lucknowi

Intikhab-e-Deewan-e-Momin

Ma Sharah

1958

Intikhab-e-Deewan-e-Momin

Ma Sharh-o-Tanqeed

1959

मैख़ाना-ए-तग़ज़्ज़ुल

1954

Momin Aur Mutala-e-Momin

1961

Momin Aur Uski Shayari

1979

मोमिन देहलवी

हालत-ए-ज़िन्दगी और इंतिख़ाब-ए-कलाम

1957

मोमिन हयात-ओ-शायरी

1965

Momin Khan Momin

Ek Mutala

2008

Momin Khan Momin

Hayat Aur Mutaliati Tarjeehat

Momin Khan Momin

Hindustani Adab Ke Memar

1985

Momin Khan Momin

Hayat-o-Shayari

1991

Muntakhab Ghazlain

Wali Se Faiz Tak

1999

Mutala-e-Momin

1985

क़साइद-ए-मोमिन

Ma Sharh

1960

Yadgar-e-Momin

Ghalib Nama

Shumara Number: 002

1985