Muzaffar Razmi's Photo'

मुज़फ़्फ़र रज़्मी

1936 - 2012 | मुजफ्फरनगर, भारत

अपने शेर 'ये जब्र भी देखा है तारीख़ की नज़रों ने' के लिए विख्यात।

अपने शेर 'ये जब्र भी देखा है तारीख़ की नज़रों ने' के लिए विख्यात।

मुज़फ़्फ़र रज़्मी के ऑडियो

ग़ज़ल

अभी ख़ामोश हैं शोलों का अंदाज़ा नहीं होता

नोमान शौक़

इस राज़ को क्या जानें साहिल के तमाशाई

नोमान शौक़

कोई सौग़ात-ए-वफ़ा दे के चला जाऊँगा

नोमान शौक़

ख़ुद पुकारेगी जो मंज़िल तो ठहर जाऊँगा

नोमान शौक़

नाकामी-ए-क़िस्मत का गिला छोड़ दिया है

नोमान शौक़

फ़राज़-ए-दार पे इक दिन सजा के देख हमें

नोमान शौक़

मुक़ाबले तो ग़लत-फ़हमियाँ बढ़ाते हैं

नोमान शौक़

मसअले भी मिरे हमराह चले आते हैं

नोमान शौक़

याद ये किस की आ गई ज़ेहन का बोझ उतर गया

नोमान शौक़

शाम-ए-ग़म है तिरी यादों को सजा रक्खा है

नोमान शौक़

हुजूम-ए-ग़म में किस ज़िंदा-दिली से

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

बोलिए