Muzaffar Razmi's Photo'

मुज़फ़्फ़र रज़्मी

1936 - 2012 | मुजफ्फरनगर, भारत

अपने शेर 'ये जब्र भी देखा है तारीख़ की नज़रों ने' के लिए विख्यात।

अपने शेर 'ये जब्र भी देखा है तारीख़ की नज़रों ने' के लिए विख्यात।

ग़ज़ल 11

शेर 8

ये जब्र भी देखा है तारीख़ की नज़रों ने

लम्हों ने ख़ता की थी सदियों ने सज़ा पाई

क़रीब आओ तो शायद समझ में जाए

कि फ़ासले तो ग़लत-फ़हमियाँ बढ़ाते हैं

ख़ुद पुकारेगी जो मंज़िल तो ठहर जाऊँगा

वर्ना ख़ुद्दार मुसाफ़िर हूँ गुज़र जाऊँगा

मुझ को हालात में उलझा हुआ रहने दे यूँही

मैं तिरी ज़ुल्फ़ नहीं हूँ जो सँवर जाऊँगा

मेरे दामन में अगर कुछ रहेगा बाक़ी

अगली नस्लों को दुआ दे के चला जाऊँगा

पुस्तकें 1

Lamhon Ki Khata

 

2000

 

वीडियो 3

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
At a Mushaira

मुज़फ़्फ़र रज़्मी

Mushaira Urdu Academy Chenni

मुज़फ़्फ़र रज़्मी

Reciting own poetry

मुज़फ़्फ़र रज़्मी

ऑडियो 11

अभी ख़ामोश हैं शोलों का अंदाज़ा नहीं होता

इस राज़ को क्या जानें साहिल के तमाशाई

कोई सौग़ात-ए-वफ़ा दे के चला जाऊँगा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

संबंधित शायर

  • मुशीर झंझान्वी मुशीर झंझान्वी गुरु

"मुजफ्फरनगर" के और शायर

  • एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी
  • लकी फ़ारुक़ी हसरत लकी फ़ारुक़ी हसरत
  • ऐन इरफ़ान ऐन इरफ़ान
  • ख़्वाजा तारिक़ उस्मानी ख़्वाजा तारिक़ उस्मानी
  • हामिद मुख़्तार हामिद हामिद मुख़्तार हामिद
  • अयाज़ अहमद तालिब अयाज़ अहमद तालिब
  • नवेद अंजुम नवेद अंजुम
  • कामरान आदिल कामरान आदिल
  • मोहम्मद अमीर आज़म क़ुरैशी मोहम्मद अमीर आज़म क़ुरैशी
  • आस फ़ातमी आस फ़ातमी