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मुशीर झंझान्वी

1926 - 1990 | दिल्ली, भारत

मुशीर झंझान्वी

ग़ज़ल 12

नज़्म 1

 

अशआर 2

मसर्रतों ने तो चाहा था दिल में जाएँ

हुजूम-ए-ग़म ने मगर उन को रास्ता दिया

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वो सुन सकें कोई उनवाँ इसी लिए हम ने

बदल बदल के उन्हें दास्ताँ सुनाई है

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पुस्तकें 2

 

ऑडियो 9

तेरी चश्म-ए-सितम-ईजाद से डर लगता है

ताब-ए-नज़र से उन को परेशाँ किए हुए

दिल बेताब-ए-मर्ग-ए-ना-गहाँ बाक़ी न रह जाए

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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