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क़तील शिफ़ाई

1919 - 2001 | लाहौर, पाकिस्तान

सबसे लोकप्रिय शायरों में शामिल/प्रमुख फि़ल्म गीतकार/अपनी गज़ल ‘गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते है’ के लिए प्रसिद्ध

सबसे लोकप्रिय शायरों में शामिल/प्रमुख फि़ल्म गीतकार/अपनी गज़ल ‘गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते है’ के लिए प्रसिद्ध

सती तो मैं हो जाऊँगी पर ये मुझे बता

पहले अगर मैं मर गई जलेगा तू भी क्या

ये पैसा क्या चीज़ है खुले इस का भेद

जब आया मिरे हाथ में करने आया छेद

मत आइयो तुम शहर में बन बन नाचते मोर

निरत के दुश्मन सब यहाँ क्या हाकिम क्या चोर