Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Rana Amir Liyaqat's Photo'

राना आमिर लियाक़त

राना आमिर लियाक़त के शेर

3.9K
Favorite

श्रेणीबद्ध करें

अगरचे रोज़ मिरा सब्र आज़माता है

मगर ये दरिया मुझे तैरना सिखाता है

हर साँस नई साँस है हर दिन है मिरा दिन

तक़दीर लिए आती है हर रोज़ नया दिन

मैं जानता हूँ मोहब्बत में क्या नहीं करना

ये वो जगह है जहाँ क़ैस भी फिसलता है

कई तरह के तहाइफ़ पसंद हैं उस को

मगर जो काम यहाँ फूल से निकलता है

आओ आँखें मिला के देखते हैं

कौन कितना उदास रहता है

गले लगा के मुझे पूछ मसअला क्या है

मैं डर रहा हूँ तुझे हाल-ए-दिल सुनाने से

तुझ से कहना था हाल-ए-दिल लेकिन

तू भी दोस्त आइना निकला

आधे घर में मैं होता हूँ आधे घर में तन्हाई

कौन सी चीज़ कहाँ रख दी है कौन मुझे बतलाएगा

इस दौर-ए-ना-मुराद से ये तजरबा हुआ

दीवार गुफ़्तुगू के लिए बेहतरीन है

ख़ुदा का शुक्र कि आहट से ख़्वाब टूट गया

मैं अपने इश्क़ में नाकाम होने वाला था

वस्ल नुक़सान कर गया मेरा

मर गई आज शाएरी मेरी

हज़ार रस्ते तिरे हिज्र के इलाज के हैं

हम अहल-ए-इश्क़ ज़रा मुख़्तलिफ़ मिज़ाज के हैं

उसे पता है कहाँ हाथ थामना है मिरा

उसे पता है कहाँ पेड़ सूख जाता है

ज़िंदगी देख तिरी ख़ास रिआयत होगी

इक मोहब्बत है मिरे पास अगर करने दे

ऐसी प्यारी शाम में जी बहलाने को

पाँव निकाले जा सकते हैं चादर से

क़ीमती शय थी तिरा हिज्र उठाए रक्खा

वर्ना सैलाब में सामान कहाँ देखते हैं

नुक्ता यही अज़ल से पढ़ाया गया हमें

हव्वा बराए-हुस्न है आदम बराए-इश्क़

दिल इक ऐसा कासा है जिस की गहराई मत पूछो

जितने सिक्के डालोगे उतना ख़ाली रह जाएगा

मैं उस की नज़रों का कुछ इस लिए भी हूँ क़ाइल

वो जिस को चाहे उसे देखना सिखाता है

दिल क़नाअत ज़रा सी करता तो

हर मोहब्बत थी आख़िरी मेरी

मोहब्बतों के लिए उम्र कम है सो वो शख़्स

सभी शिकायतें कुछ दिन इधर उधर कर दे

मानूस रौशनी हुई मेरे मकान से

वो जिस्म जब निकल गया रेशम के थान से

अपना आप पड़ा रह जाता है बस इक अंदाज़े पर

आधे हम इस धरती पर हैं आधे उस सय्यारे पर

ईंट से ईंट जोड़ कर, ख़्वाब बना रहा हूँ मैं

रख़्ने डाल मेरे यार' ख़्वाब की देख-भाल में

मैं हाव-हू पे कहानी को ख़त्म कर दूँगा

ये आम बात नहीं है, इसे ख़बर लिया जाए

तुझ आँख से झलकता था एहसास-ए-ज़िंदगी

मैं देखता रहा हूँ तुझे ख़ाक-दान से

Recitation

Jashn-e-Rekhta | 8-9-10 December 2023 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate - New Delhi

GET YOUR PASS
बोलिए