Sarfraz Khalid's Photo'

सरफ़राज़ ख़ालिद

1980 | अलीगढ़, भारत

सरफ़राज़ ख़ालिद

ग़ज़ल 7

नज़्म 1

 

अशआर 47

आइने में कहीं गुम हो गई सूरत मेरी

मुझ से मिलती ही नहीं शक्ल-ओ-शबाहत मेरी

  • शेयर कीजिए

रौनक़-ए-बज़्म नहीं था कोई तुझ से पहले

रौनक़-ए-बज़्म तिरे बा'द नहीं है कोई

  • शेयर कीजिए

उसी के ख़्वाब थे सारे उसी को सौंप दिए

सो वो भी जीत गया और मैं भी हारा नहीं

  • शेयर कीजिए

उस से कह दो कि मुझे उस से नहीं मिलना है

वो है मसरूफ़ तो बे-कार नहीं हूँ मैं भी

  • शेयर कीजिए

दिल जो टूटा है तो फिर याद नहीं है कोई

इस ख़राबे में अब आबाद नहीं है कोई

  • शेयर कीजिए

संबंधित शायर

"अलीगढ़" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

बोलिए