ग़ज़ल 8

शेर 2

ईद को भी वो नहीं मिलते हैं मुझ से मिलें

इक बरस दिन की मुलाक़ात है ये भी सही

बुतों में कोई भलाई भी है सिवाए सितम

बुरा हो तेरा दिल-ए-ना-सज़ा किधर आया

 

ऑडियो 4

ज़ब्त-ए-फ़ुग़ाँ से आ गई होंटों पे जाँ तलक

न ख़ून-ए-दिल है न मय का ख़ुमार आँखों में

मुँह से तिरे सौ बार के शरमाए हुए हैं

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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