ग़ज़ल 6

शेर 4

मैं ने ज़ुल्मत के फ़ुसूँ से भागना चाहा मगर

मेरे पीछे भागती फिरती मिरी रुस्वाई थी

किस ने कर हम को दी आवाज़ पिछली रात में

कौन हम को छेड़ने आया है इन लम्हात में

पत्ता पत्ता शाख़ से टूटे दरवाज़ों पे वहशत सी

यारो प्रेम कथा में किस ने दर्द की तान मिलाई है

मसअला ये भी तो है इस अहद का जान-ए-जाँ

क्यूँ निछावर जाँ करें किस के लिए ज़िंदा रहें

दोहा 2

हर इक का दिल मोह लेती थी उस की इक मुस्कान

ये मुस्कान थी साथ उस के चेहरे की पहचान

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मुझ से कन्नी काट गोरी मैं हूँ तेरी छाया

मैं इक दाता जोगी बन कर तेरी गली में आया

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पुस्तकें 6

Kulliyat-e-Majrooh Sultanpuri

 

2003

Shahr-e-Haft Rang

 

1998

Shumara Number-004,005

1962

Shumara Number-003

1960

Shumara Number-011,012

1960

Qand Majeed Amjad Number

Shumara Number-008

1975

 

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