noImage

वली उज़लत

1692 - 1775 | हैदराबाद, भारत

उर्दू शायरी को परम्परा निर्माण करने वाले अग्रणी शायरों में शामिल

उर्दू शायरी को परम्परा निर्माण करने वाले अग्रणी शायरों में शामिल

ग़ज़ल

आज दिल बे-क़रार है मेरा

फ़सीह अकमल

ख़त ने आ कर की है शायद रहम फ़रमाने की अर्ज़

फ़सीह अकमल

ग़ैर-ए-आह-ए-सर्द नहीं दाग़ों के जाने का इलाज

फ़सीह अकमल

जूँ गुल अज़-बस-कि जुनूँ है मिरा सामान के सात

फ़सीह अकमल

न शोख़ियों से करे हैं वो चश्म-ए-गुल-गूँ रक़्स

फ़सीह अकमल

बहार आई ब-तंग आया दिल-ए-वहशत-पनाह अपना

फ़सीह अकमल

माह-ए-कामिल हो मुक़ाबिल यार के रू से चे-ख़ुश

फ़सीह अकमल

है उस की ज़ुल्फ़ से नित पंजा-ए-अदू गुस्ताख़

फ़सीह अकमल

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI