आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",pUh"
अत्यधिक संबंधित परिणाम ",puh"
ग़ज़ल
भरम खुल जाए ज़ालिम तेरे क़ामत की दराज़ी का
अगर इस तुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-ख़म का पेच-ओ-ख़म निकले
मिर्ज़ा ग़ालिब
नज़्म
रक़ीब से!
आग सी सीने में रह रह के उबलती है न पूछ
अपने दिल पर मुझे क़ाबू ही नहीं रहता है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
पृष्ठ के संबंधित परिणाम ",puh"
विषय
ग़रीब
ग़रीब
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम ",puh"
नज़्म
कभी कभी
हयात ओ मौत के पुर-हौल ख़ारज़ारों से
न कोई जादा-ए-मंज़िल न रौशनी का सुराग़
साहिर लुधियानवी
नज़्म
सुब्ह-ए-आज़ादी (अगस्त-47)
कहीं तो जा के रुकेगा सफ़ीना-ए-ग़म दिल
जवाँ लहू की पुर-असरार शाह-राहों से
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
देता हूँ तुम को ख़ुश्की-ए-मिज़्गाँ की मैं दुआ
मतलब ये है कि दामन-ए-पुर-नम मिले तुम्हें


