aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "مشجر"
शहज़ाद नय्यर
born.1973
शायर
मुशीर झंझान्वी
1926 - 1990
मुशीर-उल-हक़
1933 - 1990
लेखक
मेजर जूलियन फेलिज़ तालिब
1797 - 1840
हुसैन मुशीर अल्वी
मुशीर फ़ातिमा
मेजर बलबीर सिंह
भगवतीशरण मिश्र
सुखबिर दत्त मिश्र शास्त्री
मोहम्मद मुशीर अहमद अलवी क़ादरी
अनुवादक
मुशीर अहसन
पर्काशक
मुशीर अहमद
मेजर बी डी बासू
मेजर ए. सी. येट
लक्ष्मी शंकर मिश्र
क्या बुग़चे ताश मोशज्जर के क्या तख़्ते शाल दोशालों केसब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा
और सैर ज़रा कर लूँउस अक्स-ए-मोशज्जर की
میوؤں کی تمہید سے مسلمانوں کے دستر خوان کے الوان نعمت یاد آئے۔ خشکہ، پلاؤ، قبولی، بریانی، زردہ، شیربرنج، قورمہ، قلیہ، شوربا، کباب، یخنی، دم پخت، کوفتہ، مزعفر، مطنجن، حلوا وغیرہ مسلمانوں نے پیش کیا، اور پورے ملک کے کام ودہن نے ان کے ناموں سے لذت پائی۔ ٹھنڈک کے...
ان کبوتروں کی بھی بہت سی اقسام ہیں۔ خاص خاص نسل اور خاص خاص قسموں کے کبوتر انتخاب کئے جاتے تھے۔ الناصرالدین اللہ نے بغداد میں اور فاطمی خلفاء نے مصر میں جو محکمے قائم کئے تھے ان میں اس قسم کے لوگ خاص طور سے ملازم تھے جو کبوتروں...
अश्ख़ास और अस्नाफ़ से हट कर उस्लूबियाती तज्ज़िये की एक जिहत और भी है। चूँकि अदबी इर्तिक़ा में इज़हार के लिसानी पैराए अहद-ब-अहद तब्दील होते रहते हैं, उस्लूबियात की मदद से ये मालूम किया जा सकता है कि किस अहद में कौन सा उस्लूब राइज था या किस अहद की...
तालीम-ए-निसवान
मुशीर हुसैन क़ेदवाई
मुंशी नवल किशोर के प्रकाशन
मुसलमान और सेकुलर हिन्दुस्तान
भारत का इतिहास
Shikar Nama-e-Nizam
मेजर अफसर जंग अफसरूद्दौला
शिकारी
Bachon Ke Adab Ki Khususiyat
बाल-साहित्य
देहली की चंद तारीख़ी इमारतें
ज़ोहरा मुशीर
महिलाओं की रचनाएँ
देहली के मुसलमान दानिश्वर
मुशीरुल हसन
आलोचना
Sikh Mat
सिख-मत
रिसाला-ए-सवाल-ओ-जवाब जुग़राफ़िया तबाई
भूगोल / ज्योग्राफी
Hindustani Musalman Rawayya Aur Rujhan
लेख
मज़हब और हिंदुस्तानी मुस्लिम सियासत कल और आज
Anfas-e-Ghazal
काव्य संग्रह
Shumara Number-010
हकीम मोहम्मद हसन करशी
Jul 1933मुशीरुल अतिब्बा
Daira-e-Uloom-e-Tabiaat
विज्ञान
Jung Koh-e-Siyah
रिपोर्ताज
Musalman Aur Secular Hindustan
गोरी के संदूक़ में उम्मीदों के बीचसुर्ख़ मोशज्जर की पोशाक सिकुड़ती थी
कौन कर सकता है इस नख़्ल-ए-कुहन को सर-निगूँपहला मुशीर
पाकिस्तानी फ़ौजी कश्मीर के लिए लड़ रहे थे या कश्मीर के मुसलमानों के लिए? अगर उन्हें कश्मीर के मुसलमानों ही के लिए लड़ाया जाता था तो हैदराबाद, और जूनागढ़ के मुसलमानों के लिए क्यों उन्हें लड़ने के लिए नहीं कहा जाता था और अगर ये जंग ठेट इस्लामी जंग थी...
बे-नज़ीर है मुशीरवाह क्या जवाब है
میں نجم النسا اس کی دخت وزیرہمیشہ سے ہم راز تھی اور مشیر
کون کر سکتا ہے اس نخل کہن کو سرنگوں! پہلا مشير
एम.एस.सी. के लिए मैं फिर दिल्ली आ गई। यहाँ कॉलेज में मेरे साथ यही सब लड़कियाँ पढ़ती थीं। रेहाना, सादिया, प्रभा, फ़लानी-ढमाकी, मुझे लड़कियाँ कभी पसंद न आईं। मुझे दुनिया में ज़ियादा-तर लोग पसंद नहीं आए। बेशतर लोग महज़ तज़य्यु’ औक़ात हैं। मैं बहुत मग़रूर थी। हुस्न ऐसी चीज़ है...
سلطاں مشیر نیک و بد تھابولا کہ شہا! یہ بات کیا ہے
“जी नहीं...” “कोई नॉवेल वग़ैरा?”...
एक और मुजर्रद हैं। आपको जब मौक़ा मिले तो नमाज़ पढ़ना शुरू करदेते हैं, लेकिन इसके बावजूद आपका दिमाग़ बिल्कुल सही है। सियासियात-ए-आलम पर आपकी नज़र बहुत वसीअ है। तोतों को बातें सिखाने में महारत-ए-तामा रखते हैं। मिलिट्री के एक मेजर हैं, सन रसीदा और दौलतमंद। आपको हुक़्क़े जमा करने...
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