aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम ".fria"
बाबा फ़रीद
1179 - 1266
शायर
चार्ल्स डिकेंस
1812 - 1870
लेखक
फ़्री इन्डिया वेलफ़ेयर सोसायटी, कोलकाता
पर्काशक
फ़रीद आज़र
सी. एफ़. अंडरयोस
1871 - 1940
फ्रिज हो फ़ैन हो मोटर हो और टीवी होचलेगी लड़की वो पूरी हो या अधूरी हो
नज़्मों का विशाल संग्रह - उर्दू शायरी का एक स्वरुप नज़्म, उर्दू में एक विधा के रूप में, उन्नीसवीं सदी के आख़िरी दशकों के दौरान पैदा हुई और धीरे धीरे पूरी तरह स्थापित हो गई। नज़्म बहर और क़ाफ़िए में भी होती है और इसके बिना भी। अब नसरी नज़्म गद्द-कविता भी उर्दू में स्थापित हो गई है।
अगर आपको बस यूँही बैठे बैठे ज़रा सा झूमना है तो शराब शायरी पर हमारा ये इन्तिख़ाब पढ़िए। आप महसूस करेंगे कि शराब की लज़्ज़त और इस के सरूर की ज़रा सी मिक़दार उस शायरी में भी उतर आई है। ये शायरी आपको मज़ा तो देगी ही, साथ में हैरान भी करेगी कि शराब जो ब-ज़ाहिर बे-ख़ुदी और सुरूर बख़्शती है, शायरी मैं किस तरह मानी की एक लामहदूद कायनात का इस्तिआरा बन गई है।
शायरी, या ये कहा जाए कि अच्छा तख़्लीक़ी अदब हम को हमारे आम तजर्बात और तसव्वुरात से अलग एक नई दुनिया में ले जाता है वह हमें रोज़ मर्रा की ज़िंदगी से अलग होते हैं। क्या आप दोस्त और दोस्ती के बारे में उन बातों से वाक़िफ़ है जिन को ये शायरी मौज़ू बनाती है? दोस्त, उस की फ़ित्रत उस के जज़्बात और इरादों का ये शेरी बयानिया आप के लिए हैरानी का बाइस होगा। इसे पढ़िए और अपने आस पास फैले हुए दोस्तों को नए सिरे से देखना शुरू कीजिए।
अराई اَرائی
अढ़ाई
अरना اَرْنا
मरुस्थली भैंसा मोटा-तगड़ा, शक्तिशाली भैंसा
अर्मा اَرْما
अरे मियां की जगह पर प्रयुक्त
अर्ता' اَرْتاع
भीड़, मजमा
Free Massons Ki Apni Mazhabi Rusoom
अक्स अक्स अाइना
शबनम शमीम
पत्र
Afsa-e-Asrar Free Mission
मुंंशी ज़हीरुद्दीन
Free Coin Ki Dilchasp Kahaniyan
महिलाओं की रचनाएँ
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