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ग़ज़ल
ऐ गिर्या तू ख़ातिर से मिरी कीजो न सर्फ़ा
मैं ख़ून-ए-दिल-ए-ख़स्ता किया तुझ पे बहिल आज
क़ाएम चाँदपुरी
नज़्म
शिकवा
सफ़्हा-ए-दहर से बातिल को मिटाया हम ने
नौ-ए-इंसाँ को ग़ुलामी से छुड़ाया हम ने
अल्लामा इक़बाल
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नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
सफ़्हा-ए-दहर से बातिल को मिटाया किस ने
नौ-ए-इंसाँ को ग़ुलामी से छुड़ाया किस ने
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
मुद्दतों बा'द उस ने आज मुझ से कोई गिला किया
मंसब-ए-दिलबरी पे क्या मुझ को बहाल कर दिया
परवीन शाकिर
ग़ज़ल
हम दर्द-ब-दिल नालाँ वो दस्त-ब-दिल हैराँ
ऐ इश्क़ तो क्या ज़ालिम तेरा ही ज़माना है
जिगर मुरादाबादी
ग़ज़ल
शाम-ए-फ़िराक़ अब न पूछ आई और आ के टल गई
दिल था कि फिर बहल गया जाँ थी कि फिर सँभल गई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
इतना मालूम है!
सोच कर ये कि बहल जाए परेशानी-ए-दिल
यूँही बे-वज्ह किसी शख़्स को रोका होगा!
परवीन शाकिर
ग़ज़ल
ज़हे वो दिल जो तमन्ना-ए-ताज़ा-तर में रहे
ख़ोशा वो उम्र जो ख़्वाबों ही में बहल जाए
उबैदुल्लाह अलीम
नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
ब-हाल-ए-ना-शिता सद-ज़ख़्म-हा ओ ख़ून-हा ख़ूर्दम
ब-हर-दम शूकराँ आमेख़्ता माजून-हा ख़ूर्दम



