आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "ghun"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "ghun"
ग़ज़ल
निगाह-ए-बादा-गूँ यूँ तो तिरी बातों का क्या कहना
तिरी हर बात लेकिन एहतियातन छान लेते हैं
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
हसन कूज़ा-गर (1)
संग-बस्ता पड़ी थी
सुराही-ओ-मीना-ओ-जाम-ओ-सुबू और फ़ानूस ओ गुल-दाँ
नून मीम राशिद
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "ghun"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "ghun"
ग़ज़ल
दिगर-गूँ है जहाँ तारों की गर्दिश तेज़ है साक़ी
दिल-ए-हर-ज़र्रा में ग़ोग़ा-ए-रुस्ता-ख़े़ज़ है साक़ी
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
जुगनू
वो कुछ नहीं है अब इक जुम्बिश-ए-ख़फ़ी के सिवा
ख़ुद अपनी कैफ़ियत-ए-नील-गूँ में हर लहज़ा
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़ज़ल
ले रहा है दर-ए-मय-ख़ाना पे सुन-गुन वाइ'ज़
रिंदो हुश्यार कि इक मुफ़सिदा-पर्दाज़ आया
शाद अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
ख़याल-ए-यार ने तो आते ही गुम कर दिया मुझ को
यही है इब्तिदा तो इंतिहा उस की कहाँ तक है
बेदम शाह वारसी
ग़ज़ल
हर गोशा-ए-मग़रिब में हर ख़ित्ता-ए-मशरिक़ में
तशरीह दिगर-गूँ है अब तेरे पयामों की
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
ज़ुल्फ़-ए-शब-गूँ तिरे शाने पे खुली नागिन है
डस ले ये जिस को न फिर उठ के वो पानी माँगे
नुशूर वाहिदी
नज़्म
एक ग़मगीन याद
मिरे बाज़ू पे जब वो ज़ुल्फ़-ए-शब-गूँ खोल देती थी
ज़माना निकहत-ए-ख़ुल्द-ए-बरीं में डूब जाता था
असरार-उल-हक़ मजाज़
ग़ज़ल
साक़ी के हुस्न-ए-दीदा-ए-मय-गूँ के सामने
मैं जल्वा-ए-बहिश्त को ठुकरा के पी गया












