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गीत
देखें इन नक़ली चेहरों की कब तक जय-जय-कार चले
उजले कपड़ों की तह में कब तक काला संसार चले
साहिर लुधियानवी
शेर
साँवले तन पे ग़ज़ब धज है बसंती शाल की
जी में है कह बैठिए अब जय कनहय्या लाल की
इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
नज़्म
गुरेज़
अजीब आलम-ए-अफ़्सुर्दगी है रू-बा-फ़रोग़
न जब नज़र को तक़ाज़ा न दिल तमन्नाई
साहिर लुधियानवी
नज़्म
आओ फिर से दिया जलाएँ
वर्तमान के मोह जाल में आने वाला कल न भुलाएँ
आओ फिर से दिया जलाएँ
अटल बिहारी वाजपेयी
ग़ज़ल
रोज़-ए-अव्वल से है फ़ितरत का रक़ीब आदम-ज़ाद
धूप निकली तो मिरे जिस्म से साया निकला
अहमद नदीम क़ासमी
नज़्म
चेहरा तेरा
पुतलियाँ दोनों तिरी आँखों में दो नीलम लगे
और तिरी आँखों का पानी मुझ को जाम-ए-जम लगे












