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ग़ज़ल
कौन अंदेशा-ए-फ़र्दा का मलाल आज करे
मौसम-ए-गुल में नहीं फ़िक्र-ए-ज़मिस्ताँ मुझ को
असद अली ख़ान क़लक़
ग़ज़ल
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
परवीन शाकिर
नज़्म
शिकवा
क़ौम-ए-आवारा इनाँ-ताब है फिर सू-ए-हिजाज़
ले उड़ा बुलबुल-ए-बे-पर को मज़ाक़-ए-परवाज़
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
इस क़दर शोख़ कि अल्लाह से भी बरहम है
था जो मस्जूद-ए-मलाइक ये वही आदम है
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
कहीं चाक-ए-जाँ का रफ़ू नहीं किसी आस्तीं पे लहू नहीं
कि शहीद-ए-राह-ए-मलाल का नहीं ख़ूँ-बहा उसे भूल जा
अमजद इस्लाम अमजद
ग़ज़ल
गया तो इस तरह गया कि मुद्दतों नहीं मिला
मिला जो फिर तो यूँ कि वो मलाल में मिला मुझे
मुनीर नियाज़ी
नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
शुमाल-ए-जावेदाँ अपना शुमाल-ए-जावेदान-ए-जाँ
है अब भी अपनी पूँजी इक मलाल-ए-जावेदान-ए-जाँ
जौन एलिया
नज़्म
ए'तिराफ़
शिद्दत-ए-कर्ब में डूबी हुई मेरी गुफ़्तार
मैं कि ख़ुद अपने मज़ाक़-ए-तरब-आगीं का शिकार








