आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "phaa.nde"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "phaa.nde"
ग़ज़ल
बला-ए-जाँ हैं ये तस्बीह और ज़ुन्नार के फंदे
दिल-ए-हक़-बीं को हम इस क़ैद से आज़ाद करते हैं
चकबस्त बृज नारायण
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "phaa.nde"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
रेख़्ता शब्दकोश
ThanDe
ठंडे ٹھنڈے
ठंडा का बहु., तथा लघु., शीतल, कूल, उत्तेजित न होने वाला, गर्मी दूर करने वाला, सुख देने वाला, सुकून बख़श
phanDaa
फंडा پَھنْڈا
رک : پھندا (رک) .
अन्य परिणाम "phaa.nde"
ग़ज़ल
देख लो ऐ गुल-रुख़ो मुर्ग़ान-ए-दिल पाबंद हैं
बाल के फँदे की सूरत हैं तुम्हारी चूड़ियाँ
मुनीर शिकोहाबादी
ग़ज़ल
इक न इक फंदे ही में फँसना है जब इंसान को
दोश पर दाम-ए-सियाह-ए-सुम्बुलिस्ताँ क्यूँ न हो
जोश मलीहाबादी
नज़्म
ख़ुशामद
हक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी
पीने और पहनने खाने की ख़ुशामद कीजे
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
दर्द-ए-मुश्तरक
मैं ने जो ज़ुल्म कभी तुझ से रवा रक्खा था
आज उसी ज़ुल्म के फंदे में गिरफ़्तार हूँ मैं
क़तील शिफ़ाई
नज़्म
भूका बंगाल
धरती-माता की छाती में चोट लगी है कारी
माया-काली के फंदे में वक़्त पड़ा है भारी
वामिक़ जौनपुरी
ग़ज़ल
फंदे में फँस के मैं उस के न हुआ फिर जाँ-बर
तार-ए-गेसू ने तिरे मार उतारा मुझ को
असद अली ख़ान क़लक़
ग़ज़ल
बहुत से रब्त इक-तरफ़ा भी होते हैं तअ’ल्लुक़ में
बराबर 'इश्क़ के फंदे में गीराई नहीं होती
आक़िब साबिर
ग़ज़ल
हुए हैं राम पीतम के नयन आहिस्ता-आहिस्ता
कि ज्यूँ फाँदे में आते हैं हिरन आहिस्ता-आहिस्ता
वली दकनी
ग़ज़ल
बूझेगा क़द्र मुझ दिल-ए-आशुफ़्ता-हाल की
फाँदे में ज़ुल्फ़ के जो गिरफ़्तार होवेगा
सिराज औरंगाबादी
नज़्म
मैं क्या बनूँगा
ये ब्योपारियों के फ़रेबों के फंदे
ये दौलत की ख़ातिर मिलावट के धंदे













