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नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
वो हँसती हो तो शायद तुम न रह पाते हो हालों में
गढ़ा नन्हा सा पड़ जाता हो शायद उस के गालों में
जौन एलिया
नज़्म
ख़िज़्र-ए-राह
चश्म-ए-दिल वा हो तो है तक़्दीर-ए-आलम बे-हिजाब
दिल में ये सुन कर बपा हंगामा-ए-मशहर हुआ
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
एक लड़का
कभी हम-सिन हसीनों में बहुत ख़ुश-काम ओ दिल-रफ़्ता
कभी पेचाँ बगूला साँ कभी ज्यूँ चश्म-ए-ख़ूँ-बस्ता
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
जुगनू
फ़ज़ा-ए-शाम में डोरे से पड़ते जाते हैं
जिधर निगाह करें कुछ धुआँ सा उठता है
फ़िराक़ गोरखपुरी
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ई-पुस्तक
संत वाणी
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नज़्म
तलबा-ए-अलीगढ़ कॉलेज के नाम
ताइर-ए-ज़ेर-ए-दाम के नाले तो सन चुके हो तुम
ये भी सुनो कि नाला-ए-ताइर-ए-बाम और है
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
सरकशी ही है जो दिखलाती है इस मज्लिस में दाग़
हो सके तो शम्अ साँ दीजे रग-ए-गर्दन जला
मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल
मोहब्बत तर्ज़-ए-पैवंद-ए-निहाल-ए-दोस्ती जाने
दवीदन रेशा साँ मुफ़्त-ए-रग-ए-ख़्वाब-ए-ज़ुलेख़ा है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
ग़ाफ़िलों के कान कब खुलते हैं सन कर शोर-ए-हश्र
सोने वालों को जगा सकता नहीं ग़ुल दूर का
अमीर मीनाई
नज़्म
मशरिक़ हार गया
'टीपू' और झांसी-की-रानी की हार नहीं है
सन-सत्तावन की जंग-ए-आज़ादी की हार नहीं है













