Fay Seen Ejaz's Photo'

फ़े सीन एजाज़

1948 | कोलकाता, भारत

ग़ज़ल 15

नज़्म 9

शेर 12

अच्छी-ख़ासी रुस्वाई का सबब होती है

दूसरी औरत पहली जैसी कब होती है

तुझ को मंज़ूर नहीं मुझ को है अब भी मंज़ूर

मेरी क़ुर्बत मिरे बोसे मुझे वापस कर दे

इश्क़ किया तो अपनी ही नादानी थी

वर्ना दुनिया जान की दुश्मन कब होती है

रुबाई 6

पुस्तकें 144

A Fairy in the Goblet

 

2009

Adeebon Ki Hayat-e-Muasheqa

 

2014

चाँद पर दुनिया

 

2014

Europe Ka Safar Nama

 

1991

Fe Seen Ejaz : Hasht Pahlu Fankar

 

2004

Hindustani Adab Ke Memar: Niyaz Fatehpuri

 

2011

इर्तिकाज़

 

2016

Islami Tasavvuf Aur Sufi

Masnavi Maulana-e-Rom Se Muntakhab Hikayat ky saath

1986

Izdawaji Sukh

 

2002

Jheel Ke Bistar Par

 

2017

"कोलकाता" के और शायर

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