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नज़्म
उपहार-ए-रक्षा-बंधन
ज़ैनब भी राहुल के हाथ में बाँध के बोली राखी
दुख-संकट के सागर की नय्या का तू है माझी
मोहम्मद हाज़िम हस्सान
ग़ज़ल
बिपता ऐसी आन परी है संकट में ये जान पड़ी है
इक मेरी जाँ सारी बलाएँ कब तक आख़िर आख़िर कब तक
ज़ुबैर बहादुर जोश
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रेख़्ता शब्दकोश
saa.ncha
साँचा سانچہ
वह उपकरण जिसके ऊपर कोई चीज रख या लगाकर उसे कोई नया आकार या रूप दिया जाता है। कलबूत। फरमा। जैसे जूता या पगड़ी बनाने का साँचा। विशेष-वस्तुतः साँचा वही होता है जिसका विवेचन ऊपर पहले अर्थ में किया गया है। दूसरे अर्थ में प्रायः लोग भूल से उसका उपयोग करते हैं। दूसरा रूप वस्तुतः ' कलबूत ' कहलाता है।
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नज़्म
श्री-कृष्णा
वो सुदामा की ग़रीबी का मिटाने वाला
काम संकट में हर इक शख़्स के आने वाला
बिस्मिल इलाहाबादी
नज़्म
मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न माँग
तेरा ग़म है तो ग़म-ए-दहर का झगड़ा क्या है
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
दाम-ए-हर-मौज में है हल्क़ा-ए-सद-काम-ए-नहंग
देखें क्या गुज़रे है क़तरे पे गुहर होते तक
मिर्ज़ा ग़ालिब
नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
दम-ए-तक़रीर थी मुस्लिम की सदाक़त बेबाक
अदल उस का था क़वी लौस-ए-मराआत से पाक
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
काम हुए हैं सारे ज़ाएअ' हर साअ'त की समाजत से
इस्तिग़्ना की चौगुनी उन ने जूँ जूँ मैं इबराम किया
मीर तक़ी मीर
नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
नहीं हो तुम मिरे और मेरा फ़र्दा भी नहीं मेरा
सो मैं ने साहत-ए-दीरोज़ में डाला है अब डेरा










