aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "tabaah"
ताबाँ अब्दुल हई
1715 - 1749
शायर
ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ
1914 - 1993
महताब राय ताबां
अनवर ताबाँ
1944 - 2016
निहाल ताबां
लेखक
राग़िबुल तब्बाख़
मतबूआ-ए-दारुत-तबा सरकार-ए-आली
पर्काशक
तबई गोलकंडवी
ज़फ़र ताबाँ
संपादक
ताबाँ नक़वी अमरोहवी
क़मर ताबाँ
born.1975
शमसुद्दीन ताबाँ
1922 - 1985
ज़फर ताबांँ एच. पी.
हबीबा ताबाँ
दारुत्तबा फ़ुनून
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बसख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
अगरचे देखने वाले तिरे हज़ारों थेतबाह-हाल बहुत ज़ेर-ए-बाम किस का था
एक ही तो हवस रही है हमेंअपनी हालत तबाह की जाए
दिन भला किस तरह गुज़ारोगेवस्ल की शब भी अब गुज़र ली है
दुश्मनों की वो फ़ौजरखती है जो कि मुझ को तबाह करने के
तबाहتَباہ
ख़राब, नष्ट, निर्जन, उजाड़
तरहتَرَہ
शाक, भाजी, साग, तरकारी ।
तरहتَرَح
अंदोह, ग़म, फ़रह की ज़िद
तरह काطَرَح کا
تھوڑا بہت ، کچھ نہ کچھ.
Jang-e-Khaleej Ki Tabah Kariyan Aur Alam-e-Islam Ka Mustaqbil
मोहम्मद अशरफ़ ज़फ़र
राजनीतिक
Cheen Ki Tabah Shudah Nasl
तारीख़-ए-अफ़कार-ओ-उलूम-ए-इस्लामी
इस्लामियात
Islami Hukumat Kis Tarah Qaim Hoti Hai
मौलाना अबुल आला मौदूदी
Tarah Daar Laundi
मुंशी सज्जाद हुसैन
फ़िक्शन
Imadut-Tahqeeq
कल्बे-आबिद
मज़ामीन / लेख
दीवान-ए-ताबाँ
दीवान
मय-ख़ाना तह-ए-हर्फ़
शोध
Paraganda Taba Log
दाऊद रहबर
Deewan-e-Taban
सर्वरूल हुदा
Tareekh-e-Afkar-o-Uloom-e-Islami
Ghalib Ki Taba-e-Nukta Joo
मशकूर हुसैन याद
Intekhab Siraj Aurangabadi
संकलन
रिसाला-ए-सवाल-ओ-जवाब जुग़राफ़िया तबाई
लक्ष्मी शंकर मिश्र
एजुकेशन / शिक्षण
Masnawi Bahram-o-Gul-e-Andam
सारे रिश्ते तबाह कर आयादिल-ए-बर्बाद अपने घर आया
मैं भी बहुत 'अजीब हूँ इतना 'अजीब हूँ कि बसख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
बिखरी हुई वो ज़ुल्फ़ इशारों में कह गईमैं भी शरीक हूँ तिरे हाल-ए-तबाह में
ज़िंदगी अपने रोग से है तबाहऔर दरमाँ की कुछ सबील नहीं
दुनिया-ए-दिल तबाह किए जा रहा हूँ मैंसर्फ़-ए-निगाह-ओ-आह किए जा रहा हूँ मैं
ये आइनों की तरह देख-भाल चाहते हैंकि दिल भी टूटें तो फिर से जुड़ा नहीं करते
दिल का था एक मुद्दआ' जिस ने तबाह कर दियादिल में थी एक ही तो बात वो जो फ़क़त सही गई
है आब-ए-नहर सूरत-ए-आईना जल्वा-गरताबाँ है मिस्ल-ए-चश्मा-ए-ख़ुर्शीद हर भँवर
दवा से फ़ाएदा मक़्सूद था ही कब कि फ़क़तदवा के शौक़ में सेहत तबाह की मैं ने
ऐ दिल-ए-तबाह ग़म ये हैरुस्वा उन की ज़ात हो गई
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