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कहानी

हरजाई

मशरब रिंदाना, मिज़ाज महरूर, तबीयत आज़ाद, अक़ाइद ला मज़हबी की तरफ़ माइल और पेशा अख़बार नवीसी। जंग यूरोप शुरू हो चुकी थी। मेरा अख़बार बंबई से शाये होता था और इस ज़माने में बहुत मक़बूल था। हुकूमत की टेढ़ी नज़रें मुझ पर पड़ रही थीं। मैं भी छेड़ से बाज़ न आता, और कुछ नहीं तो मैदान-ए-जंग की ख़बरों पर सुर्ख़ियाँ ऐसी ही लिखता था जैसे साँप बिच्छुओं के डंक इत्तिहादियों की फ़तह को भी शिकस्त बना देता था और दुश्मन की शिकस्त भी मेरे अख़बार के कालमों में शानदार मुदाफ़िअत के नाम से याद की जाती थी!... फिर क्या ताज्जुब है कि हुकूमत मुझसे हद दर्जा नाख़ुश थी।
ग़ज़ब ये हुआ कि उसी ज़माने में अफ़्ग़ानिस्तान की तरफ़ से ख़तरात पैदा होने लगे। अफ़्ग़ानों से मेरे तअल्लुक़ात वसी’ थे लिहाज़ा अब तो खु़फ़िया पुलिस की निगरानी मुझ पर इतनी सख़्त हो गई कि अगर घर में बैठ कर रोटी भी खाता तो नवालों की सही तादाद पुलिस के रजिस्टर में दर्ज हो जाती थी!...ये उस ज़माने का वाक़िया है।

क़ाज़ी अब्दुल ग़फ़्फ़ार
कहानी

चाँद तारों का लहू

हामिद पासक जब अपने दोस्तों की महफ़िल में अपने ख़्यालात का इज़हार करते तो सबको मुत्तफ़िक़ पाते थे और वो सोचते थे कि जंग की होलनाकियों ने उन्हें हक़ीक़तपसंद बना दिया है। वो अब किसी तरफ़ नहीं देखना चाहते और वो आसमान की तरफ़ देखते और ख़ुदा को पुकारते...!
वो रात क़ियामत की रात थी जब नोजा सर्ब क़ैदियों के कैंप से फ़रार होने में कामयाब हुई। उसका लिबास तारतार था और कमज़ोरी और नक़ाहत की वजह से इस के लिए चलना मुश्किल था। मारपीट से उसका हुल्या बिगड़ चुका था। उसका चेहरा भी ज़ख़्म लिए हुए था और उसकी बड़ी बड़ी ख़ूबसूरत आँखों में ख़ौफ़-ओ-हिरास था उसके सर्ब शागिर्द ने अपना बड़ा सा कोट उसके इर्दगिर्द इस तरह लपेट दिया था कि उसकी ब्रहंगी छुप सके और उसे सर्दी न लगे। वो बात करने के क़ाबिल न थी। उनके शागिर्द ने बताया कि उसे जिस हालत में पाया वो ले आया है।

अख़्तर जमाल
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रेख़्ता शब्दकोश

afghanistan

अफ़्ग़ानिस्तानافغانستان

Afghanistan

काबुलियों का देश, काबुल का मुल्क, काबुल का राष्ट्र।।

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Afghanistan Ke Umoor-e-Kharja

कबीर कौसर 

1980

Maghrib Aur Afghanistan Ki Janib Se Hindustan Par Hamle

 

1909

Afghanistan : Sachchai Kya Hai

 

1983

Afghanistan-Roosi Dahshat Gardi Se Amriki Dahshat Gardi Tak

ख़ान मोहम्मद आतिफ़ 

2012

तारीख़-ए-अफ़ग़ानिस्तान-ओ-सिंध

 

इतिहास

Afghanistan Ke Waqiat Sachchai Kya Hai ?

ग़ुलाम हैदर 

1980

Afghanistan Inqalab Ki Pesh Raft

मीख़ाइल अलेंस्की 

1981

Afghanistan-e-Jadeed

एम. एम. फ़ाज़िल मीर मुंशी 

1922

Afghanistan Ki Safarati Tareekh

कबीर कौसर 

इंक़लाब-ए-अफ़्ग़ानिस्तान

मोहम्मद हुसैन ख़ान 

1931इतिहास

Turky Iran Afghanistan Japan

अननोन ऑथर 

1994

Inqilab-e-Afghanistan

मोहम्मद हुसैन ख़ान 

1931

Tareekh-e-Bukhara

आरमीनियस वेम्बरे 

1959इतिहास