aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "sidhaar"
कौन बताए कौन सुझाए कौन से देस सिधार गएउन का रस्ता तकते तकते नैन हमारे हार गए
चाँद का पत्थर बाँध के तन से उतरी मंज़र-ए-ख़्वाब में चुपचिड़ियाँ दूर सिधार गईं और डूब गई तालाब में चुप
किस देस को सिधार गईं ऐ जमाल-ए-याररंगीं लबों पे खेल के कुछ मुस्कुराहटें
लड़कियाँ गाँव से सिधार गईंहिरनियों से हुए ख़ुतन ख़ाली
झलक दिखा के अचानक सिधार जाता हैमिसाल-ए-ख़्वाब हसीं है हक़ीक़त-ए-इंसाँ
अब उस के शहर में ठहरें कि कूच कर जाएँ'फ़राज़' आओ सितारे सफ़र के देखते हैं
वीराँ है मय-कदा ख़ुम-ओ-साग़र उदास हैंतुम क्या गए कि रूठ गए दिन बहार के
हम-सफ़र चाहिए हुजूम नहींइक मुसाफ़िर भी क़ाफ़िला है मुझे
है उसे दूर का सफ़र दर-पेशहम सँभाले नहीं सँभलते हैं
मुझ को चलने दो अकेला है अभी मेरा सफ़ररास्ता रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा
अपने शहर के सब लोगों सेमेरी ख़ातिर क्यूँ उलझे हो
सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलोसभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
मैं तिरे साथ सितारों से गुज़र सकता हूँकितना आसान मोहब्बत का सफ़र लगता है
वो हम-सफ़र था मगर उस से हम-नवाई न थीकि धूप छाँव का आलम रहा जुदाई न थी
गो हाथ को जुम्बिश नहीं आँखों में तो दम हैरहने दो अभी साग़र-ओ-मीना मिरे आगे
जुदाइयाँ तो मुक़द्दर हैं फिर भी जान-ए-सफ़रकुछ और दूर ज़रा साथ चल के देखते हैं
राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलेंरास्ते आवाज़ देते हैं सफ़र जारी रखो
कू-ए-जानाँ में सोग बरपा हैकि अचानक सुधर गया हूँ मैं
क्या भला साग़र-ए-सिफ़ाल कि हमनाफ़-प्याले को जाम कर रहे हैं
समुंदर के सफ़र में इस तरह आवाज़ दे हम कोहवाएँ तेज़ हों और कश्तियों में शाम हो जाए
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