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नज़्म
छा गई आशुफ़्ता हो कर वुसअ'त-ए-अफ़्लाक पर
जिस को नादानी से हम समझे थे इक मुश्त-ए-ग़ुबार
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
कि जैसे बिस्तर-ए-कम-ख़्वाब हो दीबा-ओ-मख़मल हो
मुझे इक़रार है ये ख़ेमा-ए-अफ़्लाक का साया
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
कल्ब-ए-इफ़्लास में दौलत के काशाने में मौत
दश्त ओ दर में शहर में गुलशन में वीराने में मौत
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
झुटपुटे का नर्म-रौ दरिया शफ़क़ का इज़्तिराब
खेतियाँ मैदान ख़ामोशी ग़ुरूब-ए-आफ़्ताब
जोश मलीहाबादी
नज़्म
अफ़्लाक पे जब ये लाखों तारे जगमग जगमग करती हैं
जब तारे गिन गिन कर दिल वाले ठंडी साँसें भरते हैं
बहज़ाद लखनवी
नज़्म
ख़ास चीज़ें क़ीमतें उन की तो हैं अफ़्लाक पर
आब-ख़ोरा मुँह फुलाता है अठन्नी देख कर