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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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Best Tea Shayari

ज़रा सी चाय गिरी और दाग़ दाग़ वरक़

ये ज़िंदगी है कि अख़बार का तराशा है

आमिर सुहैल

आज तो जैसे दिन के साथ दिल भी ग़ुरूब हो गया

शाम की चाय भी गई मौत के डर के साथ साथ

इदरीस बाबर

सिगरटें चाय धुआँ रात गए तक बहसें

और कोई फूल सा आँचल कहीं नम होता है

वाली आसी

आज फिर चाय बनाते हुए वो याद आया

आज फिर चाय में पत्ती नहीं डाली मैं ने

तरुणा मिश्रा

छोड़ आया था मेज़ पर चाय

ये जुदाई का इस्तिआरा था

तौक़ीर अब्बास

कई झमेलों में उलझी सी बद-मज़ा चाय

उदास मेज़ पे दफ़्तर के काग़ज़ात का दुख

साइमा आफ़्ताब

बिखरता जाता है कमरे में सिगरटों का धुआँ

पड़ा है ख़्वाब कोई चाय की प्याली में

नज़ीर क़ैसर

तुझ में कस-बल है तो दुनिया को बहा कर ले जा

चाय की प्याली में तूफ़ान उठाता क्या है

शहज़ाद अहमद

घी मिस्री भी भेज कभी अख़बारों में

कई दिनों से चाय है कड़वी या अल्लाह

निदा फ़ाज़ली

क़ुमक़ुमों की तरह क़हक़हे जल बुझे

मेज़ पर चाय की प्यालियाँ रह गईं

ख़ालिद अहमद
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