aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
किस से उम्मीद करें कोई इलाज-ए-दिल की
चारागर भी तो बहुत दर्द का मारा निकला
तुम्हें ग़ैरों से कब फ़ुर्सत हम अपने ग़म से कम ख़ाली
चलो बस हो चुका मिलना न तुम ख़ाली न हम ख़ाली
कोई है मस्त कोई तिश्ना-काम है साक़ी
ये मय-कदे का तिरे क्या निज़ाम है साक़ी
यूँ तो अब भी है वही रंज वही महरूमी
वो जो इक तेरी तरफ़ से था इशारा न रहा
तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था
उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books