aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
ख़बर-ए-तहय्युर-ए-इश्क़ सुन न जुनूँ रहा न परी रही
न तो तू रहा न तो मैं रहा जो रही सो बे-ख़बरी रही
क्या अजब कार-ए-तहय्युर है सुपुर्द-ए-नार-ए-इश्क़
घर में जो था बच गया और जो नहीं था जल गया
पिला साक़िया मय-ए-जाँ पिला कि मैं लाऊँ फिर ख़बर-ए-जुनूँ
ये ख़िरद की रात छटे कहीं नज़र आए फिर सहर-ए-जुनूँ
ये कैसा दश्त-ए-तहय्युर है याँ से कूच करो
हमारे पाँव से रफ़्तार खींचता है कोई
सब करिश्मात-ए-तसव्वुर हैं 'शकील'
वर्ना आता है न जाता है कोई
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