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बाल-साहित्य1989
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अब्दुल मन्नान तरज़ी के शेर
अब्दुल मन्नान तरज़ीक्या यहाँ देखिए क्या वहाँ देखिए
आप ही आप हैं अब जहाँ देखिए
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अब्दुल मन्नान तरज़ीइक क़यामत है आप का वा'दा
चलिए ये भी अज़ाब हो जाए
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अब्दुल मन्नान तरज़ीख़ून जब अश्क में ढलता है ग़ज़ल होती है
जब भी दिल रंग बदलता है ग़ज़ल होती है
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अब्दुल मन्नान तरज़ीदर्द का सिलसिला है जहाँ तक
दिल की जागीर होगी वहाँ तक
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अब्दुल मन्नान तरज़ीतेरी यादों के लम्हे भी बेदर्द थे
तुझ को मुझ से चुराते रहे रात-भर
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अब्दुल मन्नान तरज़ीहिम्मत-ए-तर्क-ए-वफ़ा डूब गई
किस ने आँखों में उतारा दरिया
अब्दुल मन्नान तरज़ीलुत्फ़-ए-सोहबत मता-ए-उल्फ़त है
कुछ कहो और कुछ सुनो प्यारे
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अब्दुल मन्नान तरज़ीऐ असीर-ए-ग़म साहिल इधर आ
बीच धारे से पुकारा दरिया
अब्दुल मन्नान तरज़ीइस कश्मकश में तेरी गली से परे रहे
आए कहाँ पे हर्फ़ कहाँ पर न आए हर्फ़
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अब्दुल मन्नान तरज़ीनाम-लेवा तुम्हारा है 'तरज़ी'
आदमी की तरह मिलो प्यारे
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