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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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Bazagh Bihari's Photo'

बाज़ग़ बिहारी

बाज़ग़ बिहारी के शेर

वो कितनी झिड़कियाँ खाते हैं सुब्ह-ओ-शाम बीवी की

मगर वाइज़ को देखा आप ने आह-ओ-फ़ुग़ाँ करते

तीन बेटे थे ख़ुदा के फ़ज़्ल से मेरे मगर

इन्ना लिल्लाह आख़िरी बेटा भी शाइ'र हो गया

मसअला हो सामने तो इस का हल भी चाहिए

जब गला अच्छा हो तो अच्छी ग़ज़ल भी चाहिए

मुँह अपना एक बार जला था जो दूध से

पीने लगे हैं फूँक के मठ्ठा तभी से हम

उठाया जिस ने भी जूता बढ़ाया सर हम ने

क़ुसूर-वार बस अपना ही सर लगे है हमें

ख़ुश्बू-ए-मुर्ग़ आती है हर लफ़्ज़ लफ़्ज़ से

करते हैं गुफ़्तुगू जो किसी मौलवी से हम

बड़ा एहसान है बेगम सुधारा आप ने मुझ को

वगर्ना ज़िंदगी कटती मिरी ख़र-मस्तियाँ करते

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