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इम्दाद साबरी का परिचय
पहचान: स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, लेखक और जननेता
मौलाना इमदाद साबरी उपमहाद्वीप के उन साहसी पत्रकारों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं में थे जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन, पत्रकारिता, सामाजिक सुधार और जन अधिकारों के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। वे सच्चे स्वतंत्रता सेनानी, निडर पत्रकार और अनुभवी लेखक थे।उनका जन्म 16 अक्तूबर 1914 को दिल्ली के प्रसिद्ध इलाके चूड़ीवालान में हुआ। वे एक विद्वान परिवार में पैदा हुए। उनके पिता अशरफ हक साबरी अपने समय के प्रसिद्ध आलिम थे और हाजी इमदादुल्लाह मुहाजिर मक्की तथा राशिद अहमद गंगोही से उनका विशेष संबंध था। इसी कारण उन्होंने अपने बेटे का नाम “इमदादुर्रशीद साबरी” रखा।
प्रारंभिक शिक्षा अंग्रेज़ी में हुई। सहारनपुर में फ़ारसी और अरबी पढ़ी। 1930 में पंजाब यूनिवर्सिटी से कॉलेज शिक्षा पूरी की। अदीब और फ़ाज़िल की परीक्षाएँ पास कीं। 1937 की कैद के दौरान हिंदी सीखी और साहित्य में गहरी रुचि पैदा हुई।
कम उम्र से ही उनमें क्रांतिकारी स्वभाव था। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना वे अपना कर्तव्य मानते थे। सत्रह वर्ष की आयु में एक अंग्रेज़ पुलिस अफसर को एक महिला पर डंडा उठाते देखकर विरोध किया, जिस पर उन्हें बुरी तरह पीटा गया।
कौम की खराब हालत देखकर उन्होंने वक्फ संपत्तियों की रक्षा का आंदोलन शुरू किया और 1936 से जामा मस्जिद दिल्ली में सुधारात्मक भाषण देने लगे। इसी कारण 1937 में धारा 107 के तहत गिरफ्तार हुए, बाद में एक हजार रुपये की ज़मानत पर रिहा हुए।
उन्होंने कई चुनाव लड़े और जीते। वे दिल्ली कॉरपोरेशन के डिप्टी मेयर भी रहे। नागरिक समस्याओं, बिजली आपूर्ति, टैक्स में राहत, अनाज की दुकानों और जन सुविधाओं के लिए आवाज उठाई। 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे और नजरबंद भी किए गए। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथियों की मदद के आरोप में जेल भी गए, लेकिन डटे रहे।
पत्रकारिता उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा थी। उन्होंने भ्रष्टाचार और सरकारी खामियों पर बेबाक लिखा। लगभग आठ अखबारों से जुड़े रहे या उनका संपादन किया, जिनमें इत्तेहाद, तेग, चिंगारी, क़ौमी हुकूमत, आज़ाद हिंदुस्तान, अंगारा, जमात और आवामी राय शामिल हैं। उनके लेखों से सरकार हरकत में आ जाती थी।
उन्होंने दर्जनों किताबें लिखीं, जिनमें प्रमुख हैं: उर्दू पत्रकारिता का इतिहास (3 भाग), अपराध और दंड का इतिहास, आज़ाद हिंद फ़ौज का इतिहास, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ, 1857 के स्वतंत्रता सेनानी शायर, दिल्ली की यादगार हस्तियाँ, दिल्ली के प्राचीन मदरसे, राजनीतिक नेताओं की माताएँ और पत्नियाँ, दक्षिण अफ्रीका के उर्दू शायर, और रूह-ए-सहाफ़त।
उन्हें पोस्टर पत्रकारिता का भी शौक था। वे रात भर जागकर प्रभावशाली पोस्टर लिखते और सुबह से पहले लगवा देते। उनके पोस्टर जनता के लिए चेतावनी जैसे होते थे।
उनका जीवन बहुत सादा था। वे विनम्र थे, लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते, और ज़रूरतमंदों के कागज़ात पर तुरंत दस्तखत कर देते।
वे सुभाष चंद्र बोस के प्रशंसक थे और आखिरी दम तक देश सेवा में लगे रहे।
निधन: 13 अक्तूबर 1988 को 74 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।
सहायक लिंक : | https://en.wikipedia.org/wiki/Imdad_Sabri
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