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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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कौसर नियाज़ी

1934 - 1994 | कराची, पाकिस्तान

कौसर नियाज़ी

ग़ज़ल 17

नज़्म 1

 

अशआर 17

चंद लम्हों के लिए एक मुलाक़ात रही

फिर वो तू वो मैं और वो रात रही

मसीहा कभी तू भी तो उसे देखने

तेरे बीमार को सुनते हैं कि आराम नहीं

अपने वहशत-ज़दा कमरे की इक अलमारी में

तेरी तस्वीर अक़ीदत से सजा रक्खी है

ज़रूर तेरी गली से गुज़र हुआ होगा

कि आज बाद-ए-सबा बे-क़रार आई है

तुझे कुछ उस की ख़बर भी है भूलने वाले

किसी को याद तेरी बार बार आई है

पुस्तकें 19

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