मजीद अमजद
पुस्तकें 4
चित्र शायरी 2
जुनून-ए-इश्क़ की रस्म-ए-अजीब क्या कहना मैं उन से दूर वो मेरे क़रीब क्या कहना ये तीरगी-ए-मुसलसल में एक वक़्फ़ा-ए-नूर ये ज़िंदगी का तिलिस्म-ए-अजीब क्या कहना जो तुम हो बर्क़-ए-नशेमन तो मैं नशेमन-ए-बर्क़ उलझ पड़े हैं हमारे नसीब क्या कहना हुजूम-ए-रंग फ़रावाँ सही मगर फिर भी बहार नौहा-ए-सद अंदलीब क्या कहना हज़ार क़ाफ़िला-ए-ज़िंदगी की तीरा-शबी ये रौशनी सी उफ़ुक़ के क़रीब क्या कहना लरज़ गई तिरी लौ मेरे डगमगाने से चराग़-ए-गोशा-ए-कू-ए-हबीब क्या कहना
वीडियो 8
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ऑडियो 16
इक उम्र दिल की घात से तुझ पर निगाह की
और अब ये कहता हूँ ये जुर्म तो रवा रखता
कभी तो सोच तिरे सामने नहीं गुज़रे
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