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आसी ग़ाज़ीपुरी

1834 - 1917

सूफ़ियाना विचारधारा के लोकप्रिय शायर

सूफ़ियाना विचारधारा के लोकप्रिय शायर

ग़ज़ल 18

शेर 13

दर्द-ए-दिल कितना पसंद आया उसे

मैं ने जब की आह उस ने वाह की

दिल दिया जिस ने किसी को वो हुआ साहिब-ए-दिल

हाथ जाती है खो देने से दौलत दिल की

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मेरी आँखें और दीदार आप का

या क़यामत गई या ख़्वाब है

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पुस्तकें 1

Intikhab-e-Kalam-e-Aasi Ghazipuri

 

1983

 

चित्र शायरी 2

वो फिर वादा मिलने का करते हैं यानी अभी कुछ दिनों हम को जीना पड़ेगा

 

ऑडियो 6

इतना तो जानते हैं कि आशिक़ फ़ना हुआ

ऐ जुनूँ फिर मिरे सर पर वही शामत आई

कलेजा मुँह को आता है शब-ए-फ़ुर्क़त जब आती है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI