noImage

अहमक़ फफूँदवी

1895 - 1957 | इटावा, भारत

हास्य और व्यंग्य के शायर

हास्य और व्यंग्य के शायर

नज़्म 10

शेर 2

ये कह रही है इशारों में गर्दिश-ए-गर्दूं

कि जल्द हम कोई सख़्त इंक़लाब देखेंगे

  • शेयर कीजिए

जो अर्ज़ां है तो है उन की मता-ए-आबरू वर्ना

ज़रा सी चीज़ भी बेहद गिराँ है इस ज़माने में

  • शेयर कीजिए
 

हास्य 1

 

पुस्तकें 3

Hazrat Ahmaq Ke Sawa Sau Sher

 

 

नक़्श-ए-हिकमत

 

1944

Zindan-e-Himaqat

 

1922

 

"इटावा" के और शायर

  • निसार इटावी निसार इटावी
  • मोहम्मद अली साहिल मोहम्मद अली साहिल