Ameen Hazin's Photo'

अमीन हज़ीं

1884 - 1967

अमीन हज़ीं के शेर

नुमूद-ए-रंग-ओ-बू ने मार डाला

उसी की आरज़ू ने मार डाला

रस्ते की ऊँच नीच से वाक़िफ़ तो हूँ 'अमीं'

ठोकर क़दम क़दम पे मगर खा रहा हूँ मैं

तुझ को तिरी ही आँख से देख रही है काएनात

बात ये राज़ की नहीं अपना ख़ुद एहतिराम कर

यूँ दिल है सर-ब-सज्दा किसी के हुज़ूर में

जैसे कि ग़ोता-ज़न हो कोई बहर-ए-नूर में

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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