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अमीक़ हनफ़ी

1928 - 1985

आधुनिक उर्दू शायरी और आलोचना का महत्वपूर्ण नाम। भारतीय दर्शन और संगीत से गहरी दिलचस्पी। आल इंडिया रेडियो से संबंधित थे।

आधुनिक उर्दू शायरी और आलोचना का महत्वपूर्ण नाम। भारतीय दर्शन और संगीत से गहरी दिलचस्पी। आल इंडिया रेडियो से संबंधित थे।

ग़ज़ल 17

नज़्म 24

शेर 19

दोनों का मिलना मुश्किल है दोनों हैं मजबूर बहुत

उस के पाँव में मेहंदी लगी है मेरे पाँव में छाले हैं

उन आँखों में डाल कर जब आँखें उस रात

मैं डूबा तो मिल गए डूबे हुए जहाज़

फूल खिले हैं लिखा हुआ है तोड़ो मत

और मचल कर जी कहता है छोड़ो मत

ई-पुस्तक 9

इंतिख़ाब-ए-अमीक़ हन्फ़ी

 

1995

Intikhab-e-Kalam Ameeq Hanafi

 

1964

Salsalat-ul-Jaras

 

1971

Sang-e-Pairahan

 

1958

शब-ए-गश्त

 

1969

Shajar Sada

 

1975

शेर चीज़-ए-दीगर अस्त

 

1983

Sindbad

 

1966

Ustad Rajab Ali Khan

 

1994

 

ऑडियो 14

ऐनक के दोनों शीशे ही अटे हुए थे धूल में

कहने को शम-ए-बज़्म-ए-ज़मान-ओ-मकाँ हूँ मैं

कौन है ये मतला-ए-तख़ईल पर महताब सा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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